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आमचो अमली अभियान में तमिलनाडु विश्वविद्यालय से ग्राफ्टेड इमली के पौधों को लाकर ग्रामों में किया जा रहा है पौधारोपण वनांचलों में ग्रामीणों की आय बढ़ाने निजी एवं सार्वजनिक भूमि पर होगा पौधारोपण गा्रफ्टेड इमली का रोपण। बस्तर की ईमली गुणवत्ता के लिये है प्रसिद्ध।दक्षिण वन मण्डल कोण्डागांव की जनहित में बेहतरीन पह

कोण्डागांव जिला वनोत्पादों के संग्रहण में देश में अग्रणी स्थान रखता है। इन वनोत्पादों में इमली का विशेष योगदान रहता है। परंतु कुछ वर्षों से इमली के उत्पादन में लगातार कमी आई है एवं पूर्व में जो वृक्ष लगाए गए थे उन की उत्पादन क्षमता लगातार घटती जा रही है। जिसे देखते हुए दक्षिण कोण्डागांव वनमंडल द्वारा इमली के उत्पादन को बढ़ाकर भविष्य में वनांचलों में निवासरत ग्रामीणों की आय को बढ़ाने के लिए दक्षिण कोण्डागांव के वनमंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता के मार्गदर्शन में आमचो अमली अभियान प्रारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत मालगांव, कुलझर, ओडारगांव, बागबेड़ा एवं देवगांव में वन प्रबंधन समिति की लाभांश राशि से ग्राफ्टेड इमली के पौधों का रोपण इस वर्ष किया जा रहा है।
प्रथम चरण में 2005 गा्रफ्टेड इमली का होगा रोपण – इस संबंध में वनमंडलाधिकारी श्री गुप्ता ने बताया कि इस अभियान से जहां ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अभिनव प्रयास वन मंडल द्वारा किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीणों की निजी भूमि तथा पंचायत की सार्वजनिक भूमि पर कुल 2005 इमली के पौधों का रोपण प्रथम चरण में किया जा रहा है। अन्य गांवों को भी जोडा जायेगा दूसरे चरण में – द्वितीय चरण में अन्य ग्राम पंचायतों को भी इस अभियान से जोड़कर और अधिक इमली के पौधे लगाई जाएंगे। इसके लिए तमिलनाडु विश्वविद्यालय के द्वारा विकसित इमली की पेरियाकुलम-1 किस्म के ग्राफ्टेड पौधों को लाकर अच्छे किस्म की इमली का उत्पादन सुनिश्चित करने के साथ अधिक से अधिक इमली उत्पादन का प्रयास किया जा रहा है।

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